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Monday, April 12, 2010

दिल से



मैं जब भी तेज़ चलता हूँ, नज़ारे छूट जाते है, कोई जब रूप गढ़ता हूँ, तो सांसे टूट जाते है, मैं रोता हूँ तो आकर लोग कन्धा थप थपाते है, मैं हस्ता हूँ, तो मुझसे लोग अक्सर रूठ जाते है.......


पनाहों में जो आया हो तो उस पर वार क्या करना, जो दिल हारा हुआ हो उस पर फिर अधिकार क्या करना, मोहब्बत का मजा तो डूबने की कशमकश मैं है, जो हो मालूम गहराई तो दरिया पार क्या करना...........


जो धरती से अम्बर जोड़े उसका नाम मोहब्बत है, जो शीशे से पत्थर तोड़े उसका नाम मोहब्बत है, कतरा कतरा सागर तक तो जाती है हर उम्र मगर, बहता दरिया वापस मोड़े उसका नाम मोहब्बत है........


स्वयम से दूर हो तुम भी, स्वयम से दूर है हम भी, बहुत मशहूर हो तुम भी, बहुत मशहूर है हम भी, बड़े मगरूर हो तुम भी, बड़े मगरूर है हम भी, अतः मजबूर हो तुम भी, अतः मजबूर है हम भी......


बन्ने को तो इन आँखों के मंजर कम नहीं बदले, तुम्हरे प्यार के मौसम हमारे गम नहीं बदले, तुम अगले जन्म में हमसे मिलोगे तब यह मानोगी , ज़माने और सदी की इस बदल में हम नहीं बदले.......


बहुत बिखरा बहुत टूटा, थपेड़े सह नहीं पाया, निगाहों के इशारो को कभी में कह नहीं पाया, अधूरा अंत सुना ही रह गया यू प्यार का किस्सा, कभी तुम सुन नहीं पाई, कभी में कह नहीं पाया....


हमारे शेर सुन कर के भी जो खामोश इतना है, खुदा जाने गुरुरे हुस्न मैं मदहोश कितना है, किसी प्याले ने पूछा है, सुराही के सबब में क्या, जो खुद बेहोश हो वो क्या बताये होश कितना है.......

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