
तोप चले या हथगोले, हम तो कहेंगे बम भोले
भंग चढ़ी होले होले, हम तो कहेंगे बम भोले
आकाशो की सेर करा दे, यह जंगले की बूटी
जिसने यह बूटी न खायी, उसकी किस्मत फूटी
खाए उम्र भर हिच गोले, हम तो कहेंगे बम भोले,
भंग चढ़ी होले होले, हम तो कहेंगे बम भोले
ठंडाई से बढ़ जाती है, इन आँखों की ज्योति
कुरता नीचे से पहने है, और ऊपर से धोती
बांध रहे है बिन खोले, हम तो कहेंगे बम भोले
भंग चढ़ी होले होले, हम तो कहेंगे बम भोले
छनी छनी नहीं मिलेगी ले गोले ही खा ले,
तौले तौले क्या करता है, बिन तौले ही खा ले
अब चाहे धरती डोले, हम तो कहेंगे बम भोले
भंग चढ़ी होले होले, हम तो कहेंगे बम भोले

न्याय और नैतिकता दोनों को पचा चुके है, लालू जी हमारी पद छोड़ नहीं पाएंगे
यादवो के राजा थे वे कृष्ण जी के वंसज थे, बासुरी बजी नहीं तो बासड़ा बजायेंगे
और एक ही डकार मैं बिहार को पचा लिया है, धीरे धीरे दल और देश को पचाएंगे
हम कहे आप कहे, पुण्य कहे पाप कहे, लालू जी के बाप कहे, लालू नहीं जायेंगे
इस बार जो बांधने और दागने से चूक गए, सत्ता की दुलहनिया है पास नहीं आएगी
और ज़िन्दगी भर कुवारे ही बने फिरोगे, घोड़ी चढ़े दुल्हे की बरात नहीं जाएगी
नारी को पटाने की कला में बड़े माहिर हो, कवी हो तो कोई खाली बात नहीं जाएगी
और इस बार जो दुपट्टा उठा के जो चली गयी, तो ज़िन्दगी में फिर सुहागरात नहींआएगी....
उत्तर प्रदेश की पुलिस पशोपेश मैं है, शाशन की आज्ञा कैसेपूरी कर पाएंगे
सारे अपराधी जब ख्ददर पहन चुके, ढूँढने को क्या उन्हें हमबीहड़ो मैं जायेंगे
छोटे मोटे अपराधियों को भेज देंगे जेल, मुख्यमंत्री जी परएक आईना दिखायेंगे
कि आप के दवारा मनोनीत मंत्री मंडल मैं, ढूँढोगे तो टॉप 10 वही मिल जायेंगे...

मैं जब भी तेज़ चलता हूँ, नज़ारे छूट जाते है, कोई जब रूप गढ़ता हूँ, तो सांसे टूट जाते है, मैं रोता हूँ तो आकर लोग कन्धा थप थपाते है, मैं हस्ता हूँ, तो मुझसे लोग अक्सर रूठ जाते है.......
पनाहों में जो आया हो तो उस पर वार क्या करना, जो दिल हारा हुआ हो उस पर फिर अधिकार क्या करना, मोहब्बत का मजा तो डूबने की कशमकश मैं है, जो हो मालूम गहराई तो दरिया पार क्या करना...........
जो धरती से अम्बर जोड़े उसका नाम मोहब्बत है, जो शीशे से पत्थर तोड़े उसका नाम मोहब्बत है, कतरा कतरा सागर तक तो जाती है हर उम्र मगर, बहता दरिया वापस मोड़े उसका नाम मोहब्बत है........
स्वयम से दूर हो तुम भी, स्वयम से दूर है हम भी, बहुत मशहूर हो तुम भी, बहुत मशहूर है हम भी, बड़े मगरूर हो तुम भी, बड़े मगरूर है हम भी, अतः मजबूर हो तुम भी, अतः मजबूर है हम भी......
बन्ने को तो इन आँखों के मंजर कम नहीं बदले, तुम्हरे प्यार के मौसम हमारे गम नहीं बदले, तुम अगले जन्म में हमसे मिलोगे तब यह मानोगी , ज़माने और सदी की इस बदल में हम नहीं बदले.......
बहुत बिखरा बहुत टूटा, थपेड़े सह नहीं पाया, निगाहों के इशारो को कभी में कह नहीं पाया, अधूरा अंत सुना ही रह गया यू प्यार का किस्सा, कभी तुम सुन नहीं पाई, कभी में कह नहीं पाया....
हमारे शेर सुन कर के भी जो खामोश इतना है, खुदा जाने गुरुरे हुस्न मैं मदहोश कितना है, किसी प्याले ने पूछा है, सुराही के सबब में क्या, जो खुद बेहोश हो वो क्या बताये होश कितना है.......