
कारगिल द्रास और बटालिक की घाटी में भारतीय लाल जो निज शीश हो गए,
सारी बर्फ चोटिया तीर्थ के समान हुई, जिन्हें रणवीर निज श्रोणित से धो गए
तो पग पग पर लहू से वन्दे मातरम लिखा, आन बान के प्रति चिर नींद सो गए,
पंचतत्व का शारीर ही तो सिर्फ विलीन हुआ, सारे ही शहीद आसमा के तारे हो गए
सिन्दूर सुहागनों के सीमा पर शहीद हुए, निज मात और पिता के अंखियो के तारे थे
भोले भाले बचपन की सदा उल्लेख मिले, बहनों की रखियो के आन बान रखवाले थे
तो प्राण दान देके जो सुरक्षा सम्मान दिया, प्यारे भारत के चीर परुष जियारे थे
कोटि कोटि कर आज नमन हम उनको, वो सारे ही शहीद भारतीयों के दुलारे थे





