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Saturday, July 24, 2010

प्यार की कहानी, दिल की जबानी


गैल्लेरी से झांकती लड़की तो दिखती है, खिड़की में खड़ा उसका बाप नहीं दिखता,
प्यार वाला राग जब बजता है दिल में तो, आरती अजानता अलाप नहीं दिखता

तो प्यार करने का हक़ सबको मिला है यहाँ, प्यार करने में कोई पाप नहीं दिखता,
पर जब देखता हूँ उसके मैं बाप को तो, अपना मिलन या मिलाप नहीं दिखता

और रथ पर सवार स्वर्ग अप्सराए तो दिखती है, भैसे पर सवार यमराज नहीं दिखता
मंच पर बैठी हुई कवित्री तो दिखती है, माइक पर खड़ा कविराज नहीं दिखता

तो किसको मैं दिल दूँ और किसको मैं प्यार करू, मुझे यहाँ कोई हमराज नहीं दिखता
प्यार के किटाणु मेरे अन्दर समा गए है, मुझे अपना कोई इलाज़ नहीं दिखता

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