
विद्यापति के पदों में खूब है श्रृंगाररस, गुरूजी पढ़ा रहे थे MA वाली क्लास में,
राधातन परछाई पड़ी जब श्याम की तो सांस में भी सांस घूली प्रेम रस रास में
पध को पढ़ा के रास्ते से गुजरे गुरूजी, एक छोरा छोरी बैठे देखे पास पास में,
छोरा बोला क्लास में यह समझी न पध भाव, इसीलिए समझा रहा हूँ इसे घास में...

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